🕉️ खगोलीय रूप से सटीक पंचांग

1 दिसंबर 2026 का पंचांग — तिथि, नक्षत्र, वार

त्वरित उत्तर: 1 दिसंबर 2026 को मंगलवार है। तिथि: कृष्ण अष्टमी (रात्रि 12:12 से रात्रि 11:14 तक)। नक्षत्र: मघा। अभिजित मुहूर्त: प्रातः 11:50 से दोपहर 12:31 तक। राहुकाल: दोपहर 02:47 से सायं 04:06 तक।

दिल्ली एनसीआर • 1 दिसंबर 2026 (मंगलवार)

🔱 विक्रम संवत 2083 • मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी
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माह दृश्य

दिसंबर 2026

रवि सोम मंगल बुध गुरु शुक्र शनि
त्योहार एकादशी पूर्णिमा अमावस्या
📅 चयनित दिन विवरण

1 दिसंबर 2026 (मंगलवार)

दिल्ली एनसीआर का पंचांग • कृष्ण अष्टमी

🕉️ विक्रम संवत 2083 • मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी
🌅 सूर्योदय
प्रातः 06:57
🌇 सूर्यास्त
सायं 05:24
✨ अभिजित
प्रातः 11:50 – दोपहर 12:31
⚠️ राहु काल
दोपहर 02:47 – सायं 04:06
☀️
वर्तमान सूर्य नक्षत्र (कृषि व वर्षा)

अनुराधा · पाद 4 (सूर्य कन्या राशि में)

धान व फसल वर्षा का मुख्य नक्षत्र (28 सितंबर – 10 अक्टूबर)
पंचांग के पांच अंग

इस दिन के पंचांग अंग

🌙
तिथि

अष्टमी

कृष्ण
अवधि: रात्रि 12:12 से रात्रि 11:14 तक
तत्पश्चात नवमी: 1 दिसंबर, रात्रि 11:14 से 2 दिसंबर, रात्रि 10:53 तक
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नक्षत्र

मघा

अवधि: 30 नवंबर, प्रातः 10:20 से 1 दिसंबर, प्रातः 09:39 तक
तत्पश्चात पूर्वा फाल्गुनी: 1 दिसंबर, प्रातः 09:39 से 2 दिसंबर, प्रातः 09:34 तक
☀️ सूर्य नक्षत्र: अनुराधा
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योग

वैधृति

सूर्य-चंद्र
अवधि: 30 नवंबर, दोपहर 03:37 से 1 दिसंबर, दोपहर 01:25 तक
तत्पश्चात विष्कम्भ: 1 दिसंबर, दोपहर 01:25 से 2 दिसंबर, प्रातः 11:44 तक
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करण

बालव

आधी तिथि
अवधि: रात्रि 12:12 से प्रातः 11:39 तक
तत्पश्चात कौलव: प्रातः 11:39 से रात्रि 11:14 तक
📅
वार

मंगलवार

सौर दिवस
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
✨ शुभ मुहूर्त एवं मांगलिक कार्य

शास्त्रीय ज्योतिष के अनुसार प्रमुख संस्कारों हेतु आज की मुहूर्त अनुकूलता

विवाह मुहूर्त सामान्य
शुभ एवं मंगलकारी नक्षत्र • अशुभ योग
गृह प्रवेश मुहूर्त सामान्य
अशुभ योग
वाहन क्रय मुहूर्त सामान्य
अशुभ योग
संपत्ति / भूमि क्रय मुहूर्त सामान्य
शुभ एवं मंगलकारी नक्षत्र • अशुभ योग
नामकरण संस्कार मुहूर्त सामान्य
अशुभ योग
⚠️ अशुभ काल समय

शुभ कार्यों के शुभारम्भ हेतु इन कालों को वर्जित माना गया है

राहु काल सर्वाधिक अशुभ

दोपहर 02:47 – सायं 04:06

यमगण्ड वर्जित

प्रातः 10:52 – दोपहर 12:10

गुलिक काल शनि प्रभाव

दोपहर 01:29 – 02:47

🪔 वैदिक अनुष्ठान एवं पूजन

दिल्ली एनसीआर में 1 दिसंबर को पूजा की योजना?

गृह प्रवेश, सत्यनारायण कथा, विवाह संस्कार एवं शांति हवन हेतु प्रमाणित वैदिक पंडितों से सीधा संपर्क करें।

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पंचांग के पांच प्रमुख अंग क्या हैं?

पंचांग का शाब्दिक अर्थ है 'पांच अंग'। वैदिक काल-गणना में ये पांच खगोलीय आधार प्रत्येक क्षण की शुभता एवं ऊर्जा का निर्धारण करते हैं।

🌙

1. तिथि

चंद्र दिवस

सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12 अंश की कोणीय दूरी। एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं।

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2. नक्षत्र

तारामंडल

चंद्रमा द्वारा पार किए जाने वाले 27 तारामंडल (प्रत्येक 13°20')।

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3. योग

सूर्य-चंद्र योग

सूर्य और चंद्र के भोगांशों का योग, जो 27 भागों में विभाजित है।

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4. करण

आधी तिथि

एक तिथि का आधा भाग (6 अंश)। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)।

📅

5. वार

सप्ताह का दिन

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का सौर दिवस, जिसके अधिपति नवग्रह होते हैं।