🕉️ खगोलीय रूप से सटीक पंचांग

13 नवंबर 2026 का पंचांग — तिथि, नक्षत्र, वार

त्वरित उत्तर: 13 नवंबर 2026 को शुक्रवार है। तिथि: शुक्ल चतुर्थी (12 नवंबर, सायं 06:10 से 13 नवंबर, रात्रि 08:43 तक)। नक्षत्र: मूल। अभिजित मुहूर्त: प्रातः 11:44 से दोपहर 12:27 तक। राहुकाल: प्रातः 10:45 से दोपहर 12:06 तक।

दिल्ली एनसीआर • 13 नवंबर 2026 (शुक्रवार)

🔱 विक्रम संवत 2083 • कार्तिक शुक्ल चतुर्थी
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माह दृश्य

नवंबर 2026

रवि सोम मंगल बुध गुरु शुक्र शनि
त्योहार एकादशी पूर्णिमा अमावस्या
📅 चयनित दिन विवरण

13 नवंबर 2026 (शुक्रवार)

दिल्ली एनसीआर का पंचांग • शुक्ल चतुर्थी

🕉️ विक्रम संवत 2083 • कार्तिक शुक्ल चतुर्थी
🌅 सूर्योदय
प्रातः 06:43
🌇 सूर्यास्त
सायं 05:29
✨ अभिजित
प्रातः 11:44 – दोपहर 12:27
⚠️ राहु काल
प्रातः 10:45 – दोपहर 12:06
☀️
वर्तमान सूर्य नक्षत्र (कृषि व वर्षा)

विशाखा · पाद 2 (सूर्य कन्या राशि में)

धान व फसल वर्षा का मुख्य नक्षत्र (28 सितंबर – 10 अक्टूबर)
🎉 आज के पर्व एवं व्रत
महोत्सव

छठ पूजा (सूर्य षष्ठी) (नहाय खाय)

सूर्य देव एवं षष्ठी मइया की उपासना का चार दिवसीय महापर्व। अस्ताचलगामी एवं उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार के कल्याण की प्रार्थना की जाती है।

📌 नैमित्तिक व्रत व्रतारम्भ: परंपरा-सापेक्ष
व्रत

विनायक चतुर्थी

शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के मध्याह्न काल में विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश की षोडशोपचार पूजा।

📌 नैमित्तिक व्रत व्रतारम्भ: परंपरा-सापेक्ष
पंचांग के पांच अंग

इस दिन के पंचांग अंग

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तिथि

चतुर्थी

शुक्ल
अवधि: 12 नवंबर, सायं 06:10 से 13 नवंबर, रात्रि 08:43 तक
तत्पश्चात पंचमी: 13 नवंबर, रात्रि 08:43 से 14 नवंबर, रात्रि 11:24 तक
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नक्षत्र

मूल

अवधि: 12 नवंबर, दोपहर 03:02 से 13 नवंबर, सायं 06:01 तक
तत्पश्चात पूर्वाषाढ़ा: 13 नवंबर, सायं 06:01 से 14 नवंबर, रात्रि 09:08 तक
☀️ सूर्य नक्षत्र: विशाखा
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योग

धृति

सूर्य-चंद्र
अवधि: 13 नवंबर, प्रातः 05:46 से 14 नवंबर, प्रातः 06:43 तक
तत्पश्चात Shula: 14 नवंबर, प्रातः 06:43 से 15 नवंबर, प्रातः 07:43 तक
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करण

वणिज

आधी तिथि
अवधि: 12 नवंबर, सायं 06:10 से 13 नवंबर, प्रातः 07:25 तक
तत्पश्चात विष्टि: प्रातः 07:25 से रात्रि 08:43 तक
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वार

शुक्रवार

सौर दिवस
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
✨ शुभ मुहूर्त एवं मांगलिक कार्य

शास्त्रीय ज्योतिष के अनुसार प्रमुख संस्कारों हेतु आज की मुहूर्त अनुकूलता

विवाह मुहूर्त सामान्य
अशुभ तिथि (रिक्ता/अमावस्या) • शुभ एवं मंगलकारी नक्षत्र • अनुकूल वार (दिन)
गृह प्रवेश मुहूर्त सामान्य
अशुभ तिथि (रिक्ता/अमावस्या) • अनुकूल वार (दिन)
वाहन क्रय मुहूर्त सामान्य
अशुभ तिथि (रिक्ता/अमावस्या) • अनुकूल वार (दिन)
संपत्ति / भूमि क्रय मुहूर्त सामान्य
अशुभ तिथि (रिक्ता/अमावस्या) • शुभ एवं मंगलकारी नक्षत्र • अनुकूल वार (दिन)
नामकरण संस्कार मुहूर्त सामान्य
अशुभ तिथि (रिक्ता/अमावस्या) • अनुकूल वार (दिन)
⚠️ अशुभ काल समय

शुभ कार्यों के शुभारम्भ हेतु इन कालों को वर्जित माना गया है

राहु काल सर्वाधिक अशुभ

प्रातः 10:45 – दोपहर 12:06

यमगण्ड वर्जित

प्रातः 06:43 – 08:03

गुलिक काल शनि प्रभाव

प्रातः 09:24 – 10:45

🪔 वैदिक अनुष्ठान एवं पूजन

दिल्ली एनसीआर में 13 नवंबर को पूजा की योजना?

गृह प्रवेश, सत्यनारायण कथा, विवाह संस्कार एवं शांति हवन हेतु प्रमाणित वैदिक पंडितों से सीधा संपर्क करें।

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पंचांग के पांच प्रमुख अंग क्या हैं?

पंचांग का शाब्दिक अर्थ है 'पांच अंग'। वैदिक काल-गणना में ये पांच खगोलीय आधार प्रत्येक क्षण की शुभता एवं ऊर्जा का निर्धारण करते हैं।

🌙

1. तिथि

चंद्र दिवस

सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12 अंश की कोणीय दूरी। एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं।

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2. नक्षत्र

तारामंडल

चंद्रमा द्वारा पार किए जाने वाले 27 तारामंडल (प्रत्येक 13°20')।

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3. योग

सूर्य-चंद्र योग

सूर्य और चंद्र के भोगांशों का योग, जो 27 भागों में विभाजित है।

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4. करण

आधी तिथि

एक तिथि का आधा भाग (6 अंश)। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)।

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5. वार

सप्ताह का दिन

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का सौर दिवस, जिसके अधिपति नवग्रह होते हैं।