🕉️ खगोलीय रूप से सटीक पंचांग

6 नवंबर 2026 का पंचांग — तिथि, नक्षत्र, वार

त्वरित उत्तर: 6 नवंबर 2026 को शुक्रवार है। तिथि: कृष्ण द्वादशी (5 नवंबर, प्रातः 10:36 से 6 नवंबर, प्रातः 10:31 तक)। नक्षत्र: हस्त। अभिजित मुहूर्त: प्रातः 11:43 से दोपहर 12:27 तक। राहुकाल: प्रातः 10:43 से दोपहर 12:05 तक।

दिल्ली एनसीआर • 6 नवंबर 2026 (शुक्रवार)

🔱 विक्रम संवत 2083 • कार्तिक कृष्ण द्वादशी
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माह दृश्य

नवंबर 2026

रवि सोम मंगल बुध गुरु शुक्र शनि
त्योहार एकादशी पूर्णिमा अमावस्या
📅 चयनित दिन विवरण

6 नवंबर 2026 (शुक्रवार)

दिल्ली एनसीआर का पंचांग • कृष्ण द्वादशी

🕉️ विक्रम संवत 2083 • कार्तिक कृष्ण द्वादशी
🌅 सूर्योदय
प्रातः 06:37
🌇 सूर्यास्त
सायं 05:33
✨ अभिजित
प्रातः 11:43 – दोपहर 12:27
⚠️ राहु काल
प्रातः 10:43 – दोपहर 12:05
☀️
वर्तमान सूर्य नक्षत्र (कृषि व वर्षा)

स्वाति · पाद 4 (सूर्य कन्या राशि में)

धान व फसल वर्षा का मुख्य नक्षत्र (28 सितंबर – 10 अक्टूबर)
🎉 आज के पर्व एवं व्रत
महोत्सव

धनतेरस (धनत्रयोदशी)

आरोग्य और समृद्धि का पर्व। भगवान धन्वंतरि, कुबेर देव एवं माँ लक्ष्मी की पूजा तथा स्वर्ण, रजत व बर्तनों की खरीदारी का शुभ दिन।

📌 नैमित्तिक व्रत व्रतारम्भ: विहित
व्रत

प्रदोष व्रत

त्रयोदशी तिथि के प्रदोष काल में भगवान शिव एवं माता पार्वती की आराधना का अत्यंत शुभ और मनोवांछित फलदायक व्रत।

📌 नैमित्तिक व्रत व्रतारम्भ: परंपरा-सापेक्ष
पंचांग के पांच अंग

इस दिन के पंचांग अंग

🌙
तिथि

द्वादशी

कृष्ण
अवधि: 5 नवंबर, प्रातः 10:36 से 6 नवंबर, प्रातः 10:31 तक
तत्पश्चात त्रयोदशी: 6 नवंबर, प्रातः 10:31 से 7 नवंबर, प्रातः 10:48 तक
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नक्षत्र

हस्त

अवधि: 6 नवंबर, प्रातः 04:36 से 7 नवंबर, प्रातः 05:24 तक
तत्पश्चात चित्रा: 7 नवंबर, प्रातः 05:24 से 8 नवंबर, प्रातः 06:33 तक
☀️ सूर्य नक्षत्र: स्वाति
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योग

विष्कम्भ

सूर्य-चंद्र
अवधि: 6 नवंबर, प्रातः 06:23 से 7 नवंबर, प्रातः 05:24 तक
तत्पश्चात Priti: 7 नवंबर, प्रातः 05:24 से 8 नवंबर, प्रातः 04:43 तक
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करण

तैतिल

आधी तिथि
अवधि: 5 नवंबर, रात्रि 10:31 से 6 नवंबर, प्रातः 10:31 तक
तत्पश्चात गरज: प्रातः 10:31 से रात्रि 10:37 तक
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वार

शुक्रवार

सौर दिवस
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
✨ शुभ मुहूर्त एवं मांगलिक कार्य

शास्त्रीय ज्योतिष के अनुसार प्रमुख संस्कारों हेतु आज की मुहूर्त अनुकूलता

विवाह मुहूर्त अनुकूल
शुभ एवं अनुकूल तिथि • शुभ एवं मंगलकारी नक्षत्र • अनुकूल वार (दिन) • अशुभ योग
गृह प्रवेश मुहूर्त सामान्य
शुभ एवं अनुकूल तिथि • अनुकूल वार (दिन) • अशुभ योग
वाहन क्रय मुहूर्त अनुकूल
शुभ एवं अनुकूल तिथि • शुभ एवं मंगलकारी नक्षत्र • अनुकूल वार (दिन)
संपत्ति / भूमि क्रय मुहूर्त सामान्य
शुभ एवं मंगलकारी नक्षत्र • अनुकूल वार (दिन) • अशुभ योग
नामकरण संस्कार मुहूर्त अनुकूल
शुभ एवं अनुकूल तिथि • शुभ एवं मंगलकारी नक्षत्र • अनुकूल वार (दिन)
⚠️ अशुभ काल समय

शुभ कार्यों के शुभारम्भ हेतु इन कालों को वर्जित माना गया है

राहु काल सर्वाधिक अशुभ

प्रातः 10:43 – दोपहर 12:05

यमगण्ड वर्जित

प्रातः 06:37 – 07:59

गुलिक काल शनि प्रभाव

प्रातः 09:21 – 10:43

🪔 वैदिक अनुष्ठान एवं पूजन

दिल्ली एनसीआर में 6 नवंबर को पूजा की योजना?

गृह प्रवेश, सत्यनारायण कथा, विवाह संस्कार एवं शांति हवन हेतु प्रमाणित वैदिक पंडितों से सीधा संपर्क करें।

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पंचांग के पांच प्रमुख अंग क्या हैं?

पंचांग का शाब्दिक अर्थ है 'पांच अंग'। वैदिक काल-गणना में ये पांच खगोलीय आधार प्रत्येक क्षण की शुभता एवं ऊर्जा का निर्धारण करते हैं।

🌙

1. तिथि

चंद्र दिवस

सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12 अंश की कोणीय दूरी। एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं।

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2. नक्षत्र

तारामंडल

चंद्रमा द्वारा पार किए जाने वाले 27 तारामंडल (प्रत्येक 13°20')।

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3. योग

सूर्य-चंद्र योग

सूर्य और चंद्र के भोगांशों का योग, जो 27 भागों में विभाजित है।

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4. करण

आधी तिथि

एक तिथि का आधा भाग (6 अंश)। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)।

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5. वार

सप्ताह का दिन

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का सौर दिवस, जिसके अधिपति नवग्रह होते हैं।