🕉️ खगोलीय रूप से सटीक पंचांग

31 अक्टूबर 2026 का पंचांग — तिथि, नक्षत्र, वार

त्वरित उत्तर: 31 अक्टूबर 2026 को शनिवार है। तिथि: कृष्ण षष्ठी (30 अक्टूबर, सायं 07:25 से 31 अक्टूबर, सायं 04:58 तक)। नक्षत्र: आर्द्रा। अभिजित मुहूर्त: प्रातः 11:43 से दोपहर 12:27 तक। राहुकाल: प्रातः 09:19 से 10:42 तक।

दिल्ली एनसीआर • 31 अक्टूबर 2026 (शनिवार)

🔱 विक्रम संवत 2083 • कार्तिक कृष्ण षष्ठी
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माह दृश्य

अक्टूबर 2026

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त्योहार एकादशी पूर्णिमा अमावस्या
📅 चयनित दिन विवरण

31 अक्टूबर 2026 (शनिवार)

दिल्ली एनसीआर का पंचांग • कृष्ण षष्ठी

🕉️ विक्रम संवत 2083 • कार्तिक कृष्ण षष्ठी
🌅 सूर्योदय
प्रातः 06:33
🌇 सूर्यास्त
सायं 05:37
✨ अभिजित
प्रातः 11:43 – दोपहर 12:27
⚠️ राहु काल
प्रातः 09:19 – 10:42
☀️
वर्तमान सूर्य नक्षत्र (कृषि व वर्षा)

स्वाति · पाद 4 (सूर्य कन्या राशि में)

धान व फसल वर्षा का मुख्य नक्षत्र (28 सितंबर – 10 अक्टूबर)
पंचांग के पांच अंग

इस दिन के पंचांग अंग

🌙
तिथि

षष्ठी

कृष्ण
अवधि: 30 अक्टूबर, सायं 07:25 से 31 अक्टूबर, सायं 04:58 तक
तत्पश्चात सप्तमी: 31 अक्टूबर, सायं 04:58 से 1 नवंबर, दोपहर 02:52 तक
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नक्षत्र

आर्द्रा

अवधि: 30 अक्टूबर, प्रातः 09:40 से 31 अक्टूबर, प्रातः 07:48 तक
तत्पश्चात पुनर्वसु: 31 अक्टूबर, प्रातः 07:48 से 1 नवंबर, प्रातः 06:16 तक
☀️ सूर्य नक्षत्र: स्वाति
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योग

सिद्ध

सूर्य-चंद्र
अवधि: 30 अक्टूबर, रात्रि 09:48 से 31 अक्टूबर, सायं 06:39 तक
तत्पश्चात साध्य: 31 अक्टूबर, सायं 06:39 से 1 नवंबर, दोपहर 03:48 तक
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करण

वणिज

आधी तिथि
अवधि: प्रातः 06:09 से सायं 04:58 तक
तत्पश्चात विष्टि: 31 अक्टूबर, सायं 04:58 से 1 नवंबर, रात्रि 03:52 तक
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वार

शनिवार

सौर दिवस
सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
✨ शुभ मुहूर्त एवं मांगलिक कार्य

शास्त्रीय ज्योतिष के अनुसार प्रमुख संस्कारों हेतु आज की मुहूर्त अनुकूलता

विवाह मुहूर्त सामान्य
गृह प्रवेश मुहूर्त सामान्य
वाहन क्रय मुहूर्त सामान्य
संपत्ति / भूमि क्रय मुहूर्त अनुकूल
शुभ एवं अनुकूल तिथि
नामकरण संस्कार मुहूर्त सामान्य
⚠️ अशुभ काल समय

शुभ कार्यों के शुभारम्भ हेतु इन कालों को वर्जित माना गया है

राहु काल सर्वाधिक अशुभ

प्रातः 09:19 – 10:42

यमगण्ड वर्जित

दोपहर 02:51 – सायं 04:14

गुलिक काल शनि प्रभाव

प्रातः 07:56 – 09:19

🪔 वैदिक अनुष्ठान एवं पूजन

दिल्ली एनसीआर में 31 अक्टूबर को पूजा की योजना?

गृह प्रवेश, सत्यनारायण कथा, विवाह संस्कार एवं शांति हवन हेतु प्रमाणित वैदिक पंडितों से सीधा संपर्क करें।

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पंचांग के पांच प्रमुख अंग क्या हैं?

पंचांग का शाब्दिक अर्थ है 'पांच अंग'। वैदिक काल-गणना में ये पांच खगोलीय आधार प्रत्येक क्षण की शुभता एवं ऊर्जा का निर्धारण करते हैं।

🌙

1. तिथि

चंद्र दिवस

सूर्य और चंद्रमा के मध्य 12 अंश की कोणीय दूरी। एक चंद्र मास में 30 तिथियां होती हैं।

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2. नक्षत्र

तारामंडल

चंद्रमा द्वारा पार किए जाने वाले 27 तारामंडल (प्रत्येक 13°20')।

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3. योग

सूर्य-चंद्र योग

सूर्य और चंद्र के भोगांशों का योग, जो 27 भागों में विभाजित है।

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4. करण

आधी तिथि

एक तिथि का आधा भाग (6 अंश)। कुल 11 करण होते हैं (4 स्थिर और 7 चर)।

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5. वार

सप्ताह का दिन

सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक का सौर दिवस, जिसके अधिपति नवग्रह होते हैं।