शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा) 2027
आश्विन पूर्णिमा की पावन रात्रि जब चंद्रमा सोलह कलाओं से युक्त होकर अमृत वर्षा करते हैं; माँ महालक्ष्मी का कोजागरी पूजन एवं खुले आकाश में खीर प्रसाद का विधान।
🔱 धार्मिक महत्व एवं कथा
निशीथ काल में माँ महालक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण कर 'को जागर्ति' (कौन जाग रहा है?) पूछती हैं। रात्रि जागरण एवं चंद्र किरणों में रखी खीर अमृततुल्य मानी जाती है।
🪔 प्रामाणिक पूजा विधि
- स्नान ध्यान कर पूजा स्थान पर लाल वस्त्र बिछाएं और माँ महालक्ष्मी व भगवान श्री हरि विष्णु की मूर्ति स्थापित करें।
- धूप, दीप, गंध, अक्षत और श्वेत/कमल पुष्प अर्पित कर श्री सूक्त या कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें।
- शुद्ध गाय के दूध, चावल, केसर और मेवे से खीर का प्रसाद तैयार करें।
- निशीथ काल में माँ लक्ष्मी की महाआरती करें और खीर को जालीदार कपड़े से ढककर रातभर चांदनी में रखें।
- अगले दिन प्रातःकाल स्नान के पश्चात अमृतमयी खीर का भोग लगाकर परिजनों में प्रसाद वितरित करें।
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❓ शरद पूर्णिमा (कोजागरी पूर्णिमा) 2027 से जुड़े प्रमुख प्रश्न
वर्ष २०२६ में शरद पूर्णिमा कब है?
वर्ष २०२६ में शरद पूर्णिमा रविवार, २५ अक्टूबर २०२६ को है। पूर्णिमा तिथि पूरी रात व्याप्त रहेगी और खीर रखने का पावन अनुष्ठान २५ अक्टूबर की रात्रि को ही होगा।
शरद पूर्णिमा की रात खीर खुले आसमान में क्यों रखी जाती है?
धार्मिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा सोलह कलाओं से युक्त होकर अमृत वर्षा करता है। खुले आकाश में रखी खीर में दिव्य औषधीय और आरोग्यकारी गुण समाहित होते हैं।